जीवन परिचय
रामधारी सिंह दिनकर रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के ऐसे ओजस्वी कवि हैं जिनके काव्य में सूर्य का ताप और लावे की गर्मी एक साथ दिखती है। रामधारी सिंह दिनकर का जन्म सन 1908 ईस्वी को बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया गांव में हुआ। इनके पिता का नाम रवि सिंह तथा माता का नाम मनरूप देवी था एक कृषक परिवार में जन्मे दिनकर जी 2 वर्ष की अल्पायु में पिता के संरक्षण से वंचित हो गए। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के पश्चात मोकामाबाद हाई स्कूल में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इंटर तथा बीए की परीक्षा पटना विश्वविद्यालय से पास करने के पश्चात पारिवारिक कारणों के कारण आगे नहीं पढ़ सके। अत: नौकरी में लग गए। कुछ दिनों तक इन्होंने प्रधानाचार्य के पद पर कार्य किया। और फिर कुछ दिनों बाद यह बिहार विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष पर आसीन हो गए।दिनकर जी भारतीय संसद के सदस्य भी निर्वाचित हुए। कुछ समय के लिए भागलपुर विश्वविद्यालय के उप कुलपति भी रहे। इसके बाद भारत सरकार के गृह विभाग में हिंदी सलाहकार के रूप में अपनी सेवा दी।

सम्मान:- दिनकर जी (jivan parichay of ramdhari singh dinkar) को अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए गए। साहित्य अकादमी का पुरस्कार उन्हें उर्वशी पर मिला और भारत सरकार की ओर से उन्हें पदम भूषण की उपाधि भी प्रदान की गई। दिनकर जी ने अनेक विदेशों का भ्रमण किया और विदेशों में हिंदी का सम्मान बढ़ाया।
देहांत:- दिनकर का प्रारंभिक जीवन अत्यंत संघर्षरत रहा। (Jivan parichay ramdhari singh dinkar) दिनकर जी का देहांत सन 1974 में हुआ। दिनकर जी आपके द्वारा दिया गया हिंदी साहित्य में योगदान के कारण हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा।
दिनकर जी की साहित्य रचनाएं:- रामधारी सिंह दिनकर जी की रचनाएं निम्नलिखित हैं रेणुका, हुंकार, इतिहास के आंसू, दिल्ली, नीम के पत्ते, कुरुक्षेत्र महाकाव्य, उर्वशी महाकाव्य, आत्मा की आंखें, परशुराम की प्रतीक्षा।
प्रमुख गद्य रचनाएं:- मिट्टी की ओर, हमारी सांस्कृतिक एकता, संस्कृति के चार अध्याय, धर्म, नैतिकता और विज्ञान, वट पीपल।निबंध संग्रह:- अर्धनारीश्वर।
भाषा शैली:- दिनकर जी की भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुलता है। उर्दू एवं अंग्रेजी के प्रचलित शब्द भी उनकी भाषा में उपलब्ध हो जाते हैं। कहीं-कहीं देशज शब्दों के साथ-साथ मुहावरों का प्रयोग भी मिल जाता है।
