अमरकांत(amarkant jivan parichay) जी का जन्म 1 जुलाई 1925 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बागलपुर(नागरा) नामक गांव में हुआ था इनका वास्तविक नाम श्री राम वर्मा है 1948 ईस्वी में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इन्होंने बी.ए की परीक्षा पास की। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण इनकी पढ़ाई में बाधा पड़ी।
साहित्य सृजन की रुचि इन्हें बचपन से थी और किशोर अवस्था से ही इन्होंने कहानी लेखन प्रारंभ कर दिया था अमरकांत ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की थी इन्होंने दैनिक अमृत पत्रिका तथा दैनिक भारत के संपादकीय विभागों में काम किया। कुछ समय तक कहानी पत्रिका के संपादन मंडल से भी जुड़े रहे।
लेखक अमरकांत द्वारा रचित रचनाएं:-
कहानी संग्रह :- जिंदगी की जोक, दोपहर का भोजन, देश के लोग, मित्र मिलन, मौत का नगर, सुख-दुख, कुहासा ।
उपन्यास:- सूखा पत्ता, ग्राम सेविका, काले उजले दिन, बीच की दीवार, आकाश पक्षी, खुदीराम।
भाषा शैली:- अमरकांत (amarkant jivan Parichay) की भाषा सरल और संजीव है जो पाठकों को आकर्षित करती है आज के सामाजिक जीवन और उसके अनुभवों को अमरकांत ने यथार्थवादी ढंग से अभिव्यक्त किया है उन्होंने अपनी कहानियों में शहरी और ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण किया है मुहावरे और शब्दों के प्रयोग से उनकी कहानियों में जीवंतता आती है वे जीवन की कथा उसी ढंग से कहते हैं जिस ढंग से जीवन चलता है।
